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परिवर्तन

  एक होस्टल कैंटीन वाले के रोज़-रोज़ नाश्ते में उपमा दे देने से परेशान 80 लोगों ने होस्टल वार्डन से शिकायत करी , और बदल-बदल के नाश्ता देने को कहा. 100 में से सिर्फ 20 लोग ऐसे थे , जिनको उपमा बहुत पसंद था , और वो लोग चाहते थे , कि   उपमा तो रोज़ ही बने. बाकी के 80 लोग परिवर्तन चाहते थे. वार्डन ने वोट करके नाश्ता तय करने को कहा. उन 20 लोगों ने , जिनको ... उपमा बहुत पसंद था ,  उपमा के लिए वोट या. बाकी बचे 80 लोगों ने   आपस में कोई सामंजस्य नहीं रखा , और कोई वार्तालाप भी हीं किया , और अपनी बुद्धि एवम् विवेक से   अपनी रूचि अनुसार वोट दिया. 18 ने डोसा ना , 16 ने परांठा , 14 ने रोटी , 12 ने ब्रेड बटर , 10 ने नूडल्स , और 10 ने पूरी सब्जी को वोट दिया.        🤔  अब सोचो   🤔           क्या हुआ होगा ?         उस कैंटीन में आज भी   वो 80 लोग , रोज़ उपमा खाते हैं.   जब तक हिस्सों में 80 बंटे रहोगे , तब तक 20% वालों का वर्चस्व रहेगा.  

महात्मा या कुख्यात .......

  सच जानना जरूरी है...! कौन था गाँधी! महात्मा या ....... वह ऐतिहासिक घटना, जिसने गाँधी का हिंदुत्व के खिलाफ उनके नफ़रत की पराकाष्ठा को सबके सामने नँगा कर दिया... * 1920 में अचानक भारत की तमाम मस्जिदों से दो किताबें वितरित की जाने लगी एक किताब का नाम था “ # कृष्ण_तेरी_गीता_जलानी_पड़ेगी "दूसरी किताब का नाम था " # उन्नीसवीं_सदी_का_लंपट_महर्षि "* यह दोनों किताबें अनाम थी इसमें किसी लेखक या प्रकाशक का नाम नहीं था और इन दोनों किताबो में भगवान श्री कृष्ण हिंदू धर्म इत्यादि पर बेहद अश्लील बेहद घिनौनी बातें लिखी गई थी और इन किताबों में तमाम देवी देवताओं के बेहद अश्लील रेखाचित्र भी बनाए गए थे। और धीरे-धीरे यह दोनों किताबे भारत की हर एक मस्जिदों में वितरित किए जाने लगे। यह बात जब महात्मा गांधी तक पहुंची तब महात्मा गांधी ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी की बात बता कर खारिज कर दिया और कहा भारत में सब को अपनी बात रखने का हक है लेकिन इन दोनों किताबों से भारत का जनमानस काफी उबल रहा था। फिर 1923 में लाहौर स्थित राजपाल प्रकाशक के मालिक महाशय राजपाल जी ने एक किताब प्रकाशित की जिसका नाम था "र...